Book 1 • Chapter 248
Section 248
10 verses
Verse 1
चलिं संग लै सखीं सयानी गावत गीत मनोहर बानी
Verse 2
सोह नवल तनु सुंदर सारी जगत जननि अतुलित छबि भारी
Verse 3
भूषन सकल सुदेस सुहाए अंग अंग रचि सखिन्ह बनाए
Verse 4
रंगभूमि जब सिय पगु धारी देखि रूप मोहे नर नारी
Verse 5
हरषि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई बरषि प्रसून अपछरा गाई
Verse 6
पानि सरोज सोह जयमाला अवचट चितए सकल भुआला
Verse 7
सीय चकित चित रामहि चाहा भए मोहबस सब नरनाहा
Verse 8
मुनि समीप देखे दोउ भाई लगे ललकि लोचन निधि पाई
Verse 9
गुरजन लाज समाजु बड़ देखि सीय सकुचानि
Verse 10
लागि बिलोकन सखिन्ह तन रघुबीरहि उर आनि
0:000:00
Speed: