Book 1 • Chapter 249
Section 249
10 verses
Verse 1
राम रूपु अरु सिय छबि देखें नर नारिन्ह परिहरीं निमेषें
Verse 2
सोचहिं सकल कहत सकुचाहीं बिधि सन बिनय करहिं मन माहीं
Verse 3
हरु बिधि बेगि जनक जड़ताई मति हमारि असि देहि सुहाई
Verse 4
बिनु बिचार पनु तजि नरनाहु सीय राम कर करै बिबाहू
Verse 5
जग भल कहहि भाव सब काहू हठ कीन्हे अंतहुँ उर दाहू
Verse 6
एहिं लालसाँ मगन सब लोगू बरु साँवरो जानकी जोगू
Verse 7
तब बंदीजन जनक बौलाए बिरिदावली कहत चलि आए
Verse 8
कह नृप जाइ कहहु पन मोरा चले भाट हियँ हरषु न थोरा
Verse 9
बोले बंदी बचन बर सुनहु सकल महिपाल
Verse 10
पन बिदेह कर कहहिं हम भुजा उठाइ बिसाल
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