Book 1 • Chapter 251
Section 251
10 verses
Verse 1
भूप सहस दस एकहि बारा लगे उठावन टरइ न टारा
Verse 2
डगइ न संभु सरासन कैसें कामी बचन सती मनु जैसें
Verse 3
सब नृप भए जोगु उपहासी जैसें बिनु बिराग संन्यासी
Verse 4
कीरति बिजय बीरता भारी चले चाप कर बरबस हारी
Verse 5
श्रीहत भए हारि हियँ राजा बैठे निज निज जाइ समाजा
Verse 6
नृपन्ह बिलोकि जनकु अकुलाने बोले बचन रोष जनु साने
Verse 7
दीप दीप के भूपति नाना आए सुनि हम जो पनु ठाना
Verse 8
देव दनुज धरि मनुज सरीरा बिपुल बीर आए रनधीरा
Verse 9
कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति कमनीय
Verse 10
पावनिहार बिरंचि जनु रचेउ न धनु दमनीय
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