Book 1 • Chapter 262
Section 262
10 verses
Verse 1
प्रभु दोउ चापखंड महि डारे देखि लोग सब भए सुखारे
Verse 2
कोसिकरुप पयोनिधि पावन प्रेम बारि अवगाहु सुहावन
Verse 3
रामरूप राकेसु निहारी बढ़त बीचि पुलकावलि भारी
Verse 4
बाजे नभ गहगहे निसाना देवबधू नाचहिं करि गाना
Verse 5
ब्रह्मादिक सुर सिद्ध मुनीसा प्रभुहि प्रसंसहि देहिं असीसा
Verse 6
बरिसहिं सुमन रंग बहु माला गावहिं किंनर गीत रसाला
Verse 7
रही भुवन भरि जय जय बानी धनुषभंग धुनि जात न जानी
Verse 8
मुदित कहहिं जहँ तहँ नर नारी भंजेउ राम संभुधनु भारी
Verse 9
बंदी मागध सूतगन बिरुद बदहिं मतिधीर
Verse 10
करहिं निछावरि लोग सब हय गय धन मनि चीर
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