Book 1 • Chapter 269
Section 269
10 verses
Verse 1
देखत भृगुपति बेषु कराला उठे सकल भय बिकल भुआला
Verse 2
पितु समेत कहि कहि निज नामा लगे करन सब दंड प्रनामा
Verse 3
जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी सो जानइ जनु आइ खुटानी
Verse 4
जनक बहोरि आइ सिरु नावा सीय बोलाइ प्रनामु करावा
Verse 5
आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं निज समाज लै गई सयानीं
Verse 6
बिस्वामित्रु मिले पुनि आई पद सरोज मेले दोउ भाई
Verse 7
रामु लखनु दसरथ के ढोटा दीन्हि असीस देखि भल जोटा
Verse 8
रामहि चितइ रहे थकि लोचन रूप अपार मार मद मोचन
Verse 9
बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर
Verse 10
पूछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर
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