Book 1 • Chapter 270
Section 270
10 verses
Verse 1
समाचार कहि जनक सुनाए जेहि कारन महीप सब आए
Verse 2
सुनत बचन फिरि अनत निहारे देखे चापखंड महि डारे
Verse 3
अति रिस बोले बचन कठोरा कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा
Verse 4
बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू
Verse 5
अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं कुटिल भूप हरषे मन माहीं
Verse 6
सुर मुनि नाग नगर नर नारी सोचहिं सकल त्रास उर भारी
Verse 7
मन पछिताति सीय महतारी बिधि अब सँवरी बात बिगारी
Verse 8
भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता अरध निमेष कलप सम बीता
Verse 9
सभय बिलोके लोग सब जानि जानकी भीरु
Verse 10
हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु
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