Book 1 • Chapter 282
Section 282
10 verses
Verse 1
देखि कुठार बान धनु धारी भै लरिकहि रिस बीरु बिचारी
Verse 2
नामु जान पै तुम्हहि न चीन्हा बंस सुभायँ उतरु तेंहिं दीन्हा
Verse 3
जौं तुम्ह औतेहु मुनि की नाईं पद रज सिर सिसु धरत गोसाईं
Verse 4
छमहु चूक अनजानत केरी चहिअ बिप्र उर कृपा घनेरी
Verse 5
हमहि तुम्हहि सरिबरि कसि नाथा कहहु न कहाँ चरन कहँ माथा
Verse 6
राम मात्र लघु नाम हमारा परसु सहित बड़ नाम तोहारा
Verse 7
देव एकु गुनु धनुष हमारें नव गुन परम पुनीत तुम्हारें
Verse 8
सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे छमहु बिप्र अपराध हमारे
Verse 9
बार बार मुनि बिप्रबर कहा राम सन राम
Verse 10
बोले भृगुपति सरुष हसि तहूँ बंधु सम बाम
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