Book 1 • Chapter 30
Section 30
12 verses
Verse 1
जागबलिक जो कथा सुहाई भरद्वाज मुनिबरहि सुनाई
Verse 2
कहिहउँ सोइ संबाद बखानी सुनहुँ सकल सज्जन सुखु मानी
Verse 3
संभु कीन्ह यह चरित सुहावा बहुरि कृपा करि उमहि सुनावा
Verse 4
सोइ सिव कागभुसुंडिहि दीन्हा राम भगत अधिकारी चीन्हा
Verse 5
तेहि सन जागबलिक पुनि पावा तिन्ह पुनि भरद्वाज प्रति गावा
Verse 6
ते श्रोता बकता समसीला सवँदरसी जानहिं हरिलीला
Verse 7
जानहिं तीनि काल निज ग्याना करतल गत आमलक समाना
Verse 8
औरउ जे हरिभगत सुजाना कहहिं सुनहिं समुझहिं बिधि नाना
Verse 9
मै पुनि निज गुर सन सुनी कथा सो सूकरखेत
Verse 10
समुझी नहि तसि बालपन तब अति रहेउँ अचेत 30(क)
Verse 11
श्रोता बकता ग्याननिधि कथा राम कै गूढ़
Verse 12
किमि समुझौं मै जीव जड़ कलि मल ग्रसित बिमूढ़ 30(ख)
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