Book 1 • Chapter 301
Section 301
10 verses
Verse 1
गरजहिं गज घंटा धुनि घोरा रथ रव बाजि हिंस चहु ओरा
Verse 2
निदरि घनहि घुर्म्मरहिं निसाना निज पराइ कछु सुनिअ न काना
Verse 3
महा भीर भूपति के द्वारें रज होइ जाइ पषान पबारें
Verse 4
चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नारीं लिंएँ आरती मंगल थारी
Verse 5
गावहिं गीत मनोहर नाना अति आनंदु न जाइ बखाना
Verse 6
तब सुमंत्र दुइ स्पंदन साजी जोते रबि हय निंदक बाजी
Verse 7
दोउ रथ रुचिर भूप पहिं आने नहिं सारद पहिं जाहिं बखाने
Verse 8
राज समाजु एक रथ साजा दूसर तेज पुंज अति भ्राजा
Verse 9
तेहिं रथ रुचिर बसिष्ठ कहुँ हरषि चढ़ाइ नरेसु
Verse 10
आपु चढ़ेउ स्पंदन सुमिरि हर गुर गौरि गनेसु
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