Book 1 • Chapter 302
Section 302
10 verses
Verse 1
सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें सुर गुर संग पुरंदर जैसें
Verse 2
करि कुल रीति बेद बिधि राऊ देखि सबहि सब भाँति बनाऊ
Verse 3
सुमिरि रामु गुर आयसु पाई चले महीपति संख बजाई
Verse 4
हरषे बिबुध बिलोकि बराता बरषहिं सुमन सुमंगल दाता
Verse 5
भयउ कोलाहल हय गय गाजे ब्योम बरात बाजने बाजे
Verse 6
सुर नर नारि सुमंगल गाई सरस राग बाजहिं सहनाई
Verse 7
घंट घंटि धुनि बरनि न जाहीं सरव करहिं पाइक फहराहीं
Verse 8
करहिं बिदूषक कौतुक नाना हास कुसल कल गान सुजाना
Verse 9
तुरग नचावहिं कुँअर बर अकनि मृदंग निसान
Verse 10
नागर नट चितवहिं चकित डगहिं न ताल बँधान
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