Book 1 • Chapter 309
Section 309
10 verses
Verse 1
रामहि देखि बरात जुड़ानी प्रीति कि रीति न जाति बखानी
Verse 2
नृप समीप सोहहिं सुत चारी जनु धन धरमादिक तनुधारी
Verse 3
सुतन्ह समेत दसरथहि देखी मुदित नगर नर नारि बिसेषी
Verse 4
सुमन बरिसि सुर हनहिं निसाना नाकनटीं नाचहिं करि गाना
Verse 5
सतानंद अरु बिप्र सचिव गन मागध सूत बिदुष बंदीजन
Verse 6
सहित बरात राउ सनमाना आयसु मागि फिरे अगवाना
Verse 7
प्रथम बरात लगन तें आई तातें पुर प्रमोदु अधिकाई
Verse 8
ब्रह्मानंदु लोग सब लहहीं बढ़हुँ दिवस निसि बिधि सन कहहीं
Verse 9
रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज
Verse 10
जहँ जहँ पुरजन कहहिं अस मिलि नर नारि समाज
0:000:00
Speed: