Book 1 • Chapter 318
Section 318
8 verses
Verse 1
बिधुबदनीं सब सब मृगलोचनि सब निज तन छबि रति मदु मोचनि
Verse 2
पहिरें बरन बरन बर चीरा सकल बिभूषन सजें सरीरा
Verse 3
सकल सुमंगल अंग बनाएँ करहिं गान कलकंठि लजाएँ
Verse 4
कंकन किंकिनि नूपुर बाजहिं चालि बिलोकि काम गज लाजहिं
Verse 5
बाजहिं बाजने बिबिध प्रकारा नभ अरु नगर सुमंगलचारा
Verse 6
सची सारदा रमा भवानी जे सुरतिय सुचि सहज सयानी
Verse 7
कपट नारि बर बेष बनाई मिलीं सकल रनिवासहिं जाई
Verse 8
करहिं गान कल मंगल बानीं हरष बिबस सब काहुँ न जानी
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