Book 1 • Chapter 319
Section 319
8 verses
Verse 1
नयन नीरु हटि मंगल जानी परिछनि करहिं मुदित मन रानी
Verse 2
बेद बिहित अरु कुल आचारू कीन्ह भली बिधि सब ब्यवहारू
Verse 3
पंच सबद धुनि मंगल गाना पट पाँवड़े परहिं बिधि नाना
Verse 4
करि आरती अरघु तिन्ह दीन्हा राम गमनु मंडप तब कीन्हा
Verse 5
दसरथु सहित समाज बिराजे बिभव बिलोकि लोकपति लाजे
Verse 6
समयँ समयँ सुर बरषहिं फूला सांति पढ़हिं महिसुर अनुकूला
Verse 7
नभ अरु नगर कोलाहल होई आपनि पर कछु सुनइ न कोई
Verse 8
एहि बिधि रामु मंडपहिं आए अरघु देइ आसन बैठाए
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