Book 1 • Chapter 320
Section 320
8 verses
Verse 1
मिले जनकु दसरथु अति प्रीतीं करि बैदिक लौकिक सब रीतीं
Verse 2
मिलत महा दोउ राज बिराजे उपमा खोजि खोजि कबि लाजे
Verse 3
लही न कतहुँ हारि हियँ मानी इन्ह सम एइ उपमा उर आनी
Verse 4
सामध देखि देव अनुरागे सुमन बरषि जसु गावन लागे
Verse 5
जगु बिरंचि उपजावा जब तें देखे सुने ब्याह बहु तब तें
Verse 6
सकल भाँति सम साजु समाजू सम समधी देखे हम आजू
Verse 7
देव गिरा सुनि सुंदर साँची प्रीति अलौकिक दुहु दिसि माची
Verse 8
देत पाँवड़े अरघु सुहाए सादर जनकु मंडपहिं ल्याए
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