Book 1 • Chapter 321
Section 321
8 verses
Verse 1
बहुरि कीन्ह कोसलपति पूजा जानि ईस सम भाउ न दूजा
Verse 2
कीन्ह जोरि कर बिनय बड़ाई कहि निज भाग्य बिभव बहुताई
Verse 3
पूजे भूपति सकल बराती समधि सम सादर सब भाँती
Verse 4
आसन उचित दिए सब काहू कहौं काह मूख एक उछाहू
Verse 5
सकल बरात जनक सनमानी दान मान बिनती बर बानी
Verse 6
बिधि हरि हरु दिसिपति दिनराऊ जे जानहिं रघुबीर प्रभाऊ
Verse 7
कपट बिप्र बर बेष बनाएँ कौतुक देखहिं अति सचु पाएँ
Verse 8
पूजे जनक देव सम जानें दिए सुआसन बिनु पहिचानें
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