Book 1 • Chapter 322
Section 322
8 verses
Verse 1
समउ बिलोकि बसिष्ठ बोलाए सादर सतानंदु सुनि आए
Verse 2
बेगि कुअँरि अब आनहु जाई चले मुदित मुनि आयसु पाई
Verse 3
रानी सुनि उपरोहित बानी प्रमुदित सखिन्ह समेत सयानी
Verse 4
बिप्र बधू कुलबृद्ध बोलाईं करि कुल रीति सुमंगल गाईं
Verse 5
नारि बेष जे सुर बर बामा सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा
Verse 6
तिन्हहि देखि सुखु पावहिं नारीं बिनु पहिचानि प्रानहु ते प्यारीं
Verse 7
बार बार सनमानहिं रानी उमा रमा सारद सम जानी
Verse 8
सीय सँवारि समाजु बनाई मुदित मंडपहिं चलीं लवाई
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