Book 1 • Chapter 323
Section 323
8 verses
Verse 1
सिय सुंदरता बरनि न जाई लघु मति बहुत मनोहरताई
Verse 2
आवत दीखि बरातिन्ह सीता रूप रासि सब भाँति पुनीता
Verse 3
सबहि मनहिं मन किए प्रनामा देखि राम भए पूरनकामा
Verse 4
हरषे दसरथ सुतन्ह समेता कहि न जाइ उर आनँदु जेता
Verse 5
सुर प्रनामु करि बरसहिं फूला मुनि असीस धुनि मंगल मूला
Verse 6
गान निसान कोलाहलु भारी प्रेम प्रमोद मगन नर नारी
Verse 7
एहि बिधि सीय मंडपहिं आई प्रमुदित सांति पढ़हिं मुनिराई
Verse 8
तेहि अवसर कर बिधि ब्यवहारू दुहुँ कुलगुर सब कीन्ह अचारू
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