Book 1 • Chapter 331
Section 331
10 verses
Verse 1
दंड प्रनाम सबहि नृप कीन्हे पूजि सप्रेम बरासन दीन्हे
Verse 2
चारि लच्छ बर धेनु मगाई कामसुरभि सम सील सुहाई
Verse 3
सब बिधि सकल अलंकृत कीन्हीं मुदित महिप महिदेवन्ह दीन्हीं
Verse 4
करत बिनय बहु बिधि नरनाहू लहेउँ आजु जग जीवन लाहू
Verse 5
पाइ असीस महीसु अनंदा लिए बोलि पुनि जाचक बृंदा
Verse 6
कनक बसन मनि हय गय स्यंदन दिए बूझि रुचि रबिकुलनंदन
Verse 7
चले पढ़त गावत गुन गाथा जय जय जय दिनकर कुल नाथा
Verse 8
एहि बिधि राम बिआह उछाहू सकइ न बरनि सहस मुख जाहू
Verse 9
बार बार कौसिक चरन सीसु नाइ कह राउ
Verse 10
यह सबु सुखु मुनिराज तव कृपा कटाच्छ पसाउ
0:000:00
Speed: