Book 1 • Chapter 336
Section 336
8 verses
Verse 1
देखि राम छबि अति अनुरागीं प्रेमबिबस पुनि पुनि पद लागीं
Verse 2
रही न लाज प्रीति उर छाई सहज सनेहु बरनि किमि जाई
Verse 3
भाइन्ह सहित उबटि अन्हवाए छरस असन अति हेतु जेवाँए
Verse 4
बोले रामु सुअवसरु जानी सील सनेह सकुचमय बानी
Verse 5
राउ अवधपुर चहत सिधाए बिदा होन हम इहाँ पठाए
Verse 6
मातु मुदित मन आयसु देहू बालक जानि करब नित नेहू
Verse 7
सुनत बचन बिलखेउ रनिवासू बोलि न सकहिं प्रेमबस सासू
Verse 8
हृदयँ लगाइ कुअँरि सब लीन्ही पतिन्ह सौंपि बिनती अति कीन्ही
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