Book 1 • Chapter 34
Section 34
10 verses
Verse 1
एहि बिधि सब संसय करि दूरी सिर धरि गुर पद पंकज धूरी
Verse 2
पुनि सबही बिनवउँ कर जोरी करत कथा जेहिं लाग न खोरी
Verse 3
सादर सिवहि नाइ अब माथा बरनउँ बिसद राम गुन गाथा
Verse 4
संबत सोरह सै एकतीसा करउँ कथा हरि पद धरि सीसा
Verse 5
नौमी भौम बार मधु मासा अवधपुरीं यह चरित प्रकासा
Verse 6
जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं तीरथ सकल तहाँ चलि आवहिं
Verse 7
असुर नाग खग नर मुनि देवा आइ करहिं रघुनायक सेवा
Verse 8
जन्म महोत्सव रचहिं सुजाना करहिं राम कल कीरति गाना
Verse 9
मज्जहि सज्जन बृंद बहु पावन सरजू नीर
Verse 10
जपहिं राम धरि ध्यान उर सुंदर स्याम सरीर
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