Book 1 • Chapter 341
Section 341
10 verses
Verse 1
मुनि मंडलिहि जनक सिरु नावा आसिरबादु सबहि सन पावा
Verse 2
सादर पुनि भेंटे जामाता रूप सील गुन निधि सब भ्राता
Verse 3
जोरि पंकरुह पानि सुहाए बोले बचन प्रेम जनु जाए
Verse 4
राम करौ केहि भाँति प्रसंसा मुनि महेस मन मानस हंसा
Verse 5
करहिं जोग जोगी जेहि लागी कोहु मोहु ममता मदु त्यागी
Verse 6
ब्यापकु ब्रह्मु अलखु अबिनासी चिदानंदु निरगुन गुनरासी
Verse 7
मन समेत जेहि जान न बानी तरकि न सकहिं सकल अनुमानी
Verse 8
महिमा निगमु नेति कहि कहई जो तिहुँ काल एकरस रहई
Verse 9
नयन बिषय मो कहुँ भयउ सो समस्त सुख मूल
Verse 10
सबइ लाभु जग जीव कहँ भएँ ईसु अनुकुल
0:000:00
Speed: