Book 1 • Chapter 36
Section 36
11 verses
Verse 1
संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी रामचरितमानस कबि तुलसी
Verse 2
करइ मनोहर मति अनुहारी सुजन सुचित सुनि लेहु सुधारी
Verse 3
सुमति भूमि थल हृदय अगाधू बेद पुरान उदधि घन साधू
Verse 4
बरषहिं राम सुजस बर बारी मधुर मनोहर मंगलकारी
Verse 5
लीला सगुन जो कहहिं बखानी सोइ स्वच्छता करइ मल हानी
Verse 6
प्रेम भगति जो बरनि न जाई सोइ मधुरता सुसीतलताई
Verse 7
सो जल सुकृत सालि हित होई राम भगत जन जीवन सोई
Verse 8
मेधा महि गत सो जल पावन सकिलि श्रवन मग चलेउ सुहावन
Verse 9
भरेउ सुमानस सुथल थिराना सुखद सीत रुचि चारु चिराना
Verse 10
सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि
Verse 11
तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि
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