Book 1 • Chapter 38
Section 38
11 verses
Verse 1
जे गावहिं यह चरित सँभारे तेइ एहि ताल चतुर रखवारे
Verse 2
सदा सुनहिं सादर नर नारी तेइ सुरबर मानस अधिकारी
Verse 3
अति खल जे बिषई बग कागा एहिं सर निकट न जाहिं अभागा
Verse 4
संबुक भेक सेवार समाना इहाँ न बिषय कथा रस नाना
Verse 5
तेहि कारन आवत हियँ हारे कामी काक बलाक बिचारे
Verse 6
आवत एहिं सर अति कठिनाई राम कृपा बिनु आइ न जाई
Verse 7
कठिन कुसंग कुपंथ कराला तिन्ह के बचन बाघ हरि ब्याला
Verse 8
गृह कारज नाना जंजाला ते अति दुर्गम सैल बिसाला
Verse 9
बन बहु बिषम मोह मद माना नदीं कुतर्क भयंकर नाना
Verse 10
जे श्रद्धा संबल रहित नहि संतन्ह कर साथ
Verse 11
तिन्ह कहुँ मानस अगम अति जिन्हहि न प्रिय रघुनाथ
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