Book 1 • Chapter 39
Section 39
15 verses
Verse 1
जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई जातहिं नींद जुड़ाई होई
Verse 2
जड़ता जाड़ बिषम उर लागा गएहुँ न मज्जन पाव अभागा
Verse 3
करि न जाइ सर मज्जन पाना फिरि आवइ समेत अभिमाना
Verse 4
जौं बहोरि कोउ पूछन आवा सर निंदा करि ताहि बुझावा
Verse 5
सकल बिघ्न ब्यापहि नहिं तेही राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही
Verse 6
सोइ सादर सर मज्जनु करई महा घोर त्रयताप न जरई
Verse 7
ते नर यह सर तजहिं न काऊ जिन्ह के राम चरन भल भाऊ
Verse 8
जो नहाइ चह एहिं सर भाई सो सतसंग करउ मन लाई
Verse 9
अस मानस मानस चख चाही भइ कबि बुद्धि बिमल अवगाही
Verse 10
भयउ हृदयँ आनंद उछाहू उमगेउ प्रेम प्रमोद प्रबाहू
Verse 11
चली सुभग कबिता सरिता सो राम बिमल जस जल भरिता सो
Verse 12
सरजू नाम सुमंगल मूला लोक बेद मत मंजुल कूला
Verse 13
नदी पुनीत सुमानस नंदिनि कलिमल तृन तरु मूल निकंदिनि
Verse 14
श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर दुहुँ कूल
Verse 15
संतसभा अनुपम अवध सकल सुमंगल मूल
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