Book 1 • Chapter 66
Section 66
10 verses
Verse 1
सरिता सब पुनित जलु बहहीं खग मृग मधुप सुखी सब रहहीं
Verse 2
सहज बयरु सब जीवन्ह त्यागा गिरि पर सकल करहिं अनुरागा
Verse 3
सोह सैल गिरिजा गृह आएँ जिमि जनु रामभगति के पाएँ
Verse 4
नित नूतन मंगल गृह तासू ब्रह्मादिक गावहिं जसु जासू
Verse 5
नारद समाचार सब पाए कौतुकहीं गिरि गेह सिधाए
Verse 6
सैलराज बड़ आदर कीन्हा पद पखारि बर आसनु दीन्हा
Verse 7
नारि सहित मुनि पद सिरु नावा चरन सलिल सबु भवनु सिंचावा
Verse 8
निज सौभाग्य बहुत गिरि बरना सुता बोलि मेली मुनि चरना
Verse 9
त्रिकालग्य सर्बग्य तुम्ह गति सर्बत्र तुम्हारि
Verse 10
कहहु सुता के दोष गुन मुनिबर हृदयँ बिचारि
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