Book 1 • Chapter 68
Section 68
10 verses
Verse 1
सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी दुख दंपतिहि उमा हरषानी
Verse 2
नारदहुँ यह भेदु न जाना दसा एक समुझब बिलगाना
Verse 3
सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना पुलक सरीर भरे जल नैना
Verse 4
होइ न मृषा देवरिषि भाषा उमा सो बचनु हृदयँ धरि राखा
Verse 5
उपजेउ सिव पद कमल सनेहू मिलन कठिन मन भा संदेहू
Verse 6
जानि कुअवसरु प्रीति दुराई सखी उछँग बैठी पुनि जाई
Verse 7
झूठि न होइ देवरिषि बानी सोचहि दंपति सखीं सयानी
Verse 8
उर धरि धीर कहइ गिरिराऊ कहहु नाथ का करिअ उपाऊ
Verse 9
कह मुनीस हिमवंत सुनु जो बिधि लिखा लिलार
Verse 10
देव दनुज नर नाग मुनि कोउ न मेटनिहार
0:000:00
Speed: