Book 1 • Chapter 70
Section 70
10 verses
Verse 1
सुरसरि जल कृत बारुनि जाना कबहुँ न संत करहिं तेहि पाना
Verse 2
सुरसरि मिलें सो पावन जैसें ईस अनीसहि अंतरु तैसें
Verse 3
संभु सहज समरथ भगवाना एहि बिबाहँ सब बिधि कल्याना
Verse 4
दुराराध्य पै अहहिं महेसू आसुतोष पुनि किएँ कलेसू
Verse 5
जौं तपु करै कुमारि तुम्हारी भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी
Verse 6
जद्यपि बर अनेक जग माहीं एहि कहँ सिव तजि दूसर नाहीं
Verse 7
बर दायक प्रनतारति भंजन कृपासिंधु सेवक मन रंजन
Verse 8
इच्छित फल बिनु सिव अवराधे लहिअ न कोटि जोग जप साधें
Verse 9
अस कहि नारद सुमिरि हरि गिरिजहि दीन्हि असीस
Verse 10
होइहि यह कल्यान अब संसय तजहु गिरीस
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