Book 1 • Chapter 71
Section 71
10 verses
Verse 1
कहि अस ब्रह्मभवन मुनि गयऊ आगिल चरित सुनहु जस भयऊ
Verse 2
पतिहि एकांत पाइ कह मैना नाथ न मैं समुझे मुनि बैना
Verse 3
जौं घरु बरु कुलु होइ अनूपा करिअ बिबाहु सुता अनुरुपा
Verse 4
न त कन्या बरु रहउ कुआरी कंत उमा मम प्रानपिआरी
Verse 5
जौं न मिलहि बरु गिरिजहि जोगू गिरि जड़ सहज कहिहि सबु लोगू
Verse 6
सोइ बिचारि पति करेहु बिबाहू जेहिं न बहोरि होइ उर दाहू
Verse 7
अस कहि परि चरन धरि सीसा बोले सहित सनेह गिरीसा
Verse 8
बरु पावक प्रगटै ससि माहीं नारद बचनु अन्यथा नाहीं
Verse 9
प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान
Verse 10
पारबतिहि निरमयउ जेहिं सोइ करिहि कल्यान
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