Book 1 • Chapter 72
Section 72
10 verses
Verse 1
अब जौ तुम्हहि सुता पर नेहू तौ अस जाइ सिखावन देहू
Verse 2
करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू आन उपायँ न मिटहि कलेसू
Verse 3
नारद बचन सगर्भ सहेतू सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू
Verse 4
अस बिचारि तुम्ह तजहु असंका सबहि भाँति संकरु अकलंका
Verse 5
सुनि पति बचन हरषि मन माहीं गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं
Verse 6
उमहि बिलोकि नयन भरे बारी सहित सनेह गोद बैठारी
Verse 7
बारहिं बार लेति उर लाई गदगद कंठ न कछु कहि जाई
Verse 8
जगत मातु सर्बग्य भवानी मातु सुखद बोलीं मृदु बानी
Verse 9
सुनहि मातु मैं दीख अस सपन सुनावउँ तोहि
Verse 10
सुंदर गौर सुबिप्रबर अस उपदेसेउ मोहि
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