Book 1 • Chapter 74
Section 74
10 verses
Verse 1
उर धरि उमा प्रानपति चरना जाइ बिपिन लागीं तपु करना
Verse 2
अति सुकुमार न तनु तप जोगू पति पद सुमिरि तजेउ सबु भोगू
Verse 3
नित नव चरन उपज अनुरागा बिसरी देह तपहिं मनु लागा
Verse 4
संबत सहस मूल फल खाए सागु खाइ सत बरष गवाँए
Verse 5
कछु दिन भोजनु बारि बतासा किए कठिन कछु दिन उपबासा
Verse 6
बेल पाती महि परइ सुखाई तीनि सहस संबत सोई खाई
Verse 7
पुनि परिहरे सुखानेउ परना उमहि नाम तब भयउ अपरना
Verse 8
देखि उमहि तप खीन सरीरा ब्रह्मगिरा भै गगन गभीरा
Verse 9
भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिजाकुमारि
Verse 10
परिहरु दुसह कलेस सब अब मिलिहहिं त्रिपुरारि
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