Book 1 • Chapter 78
Section 78
7 verses
Verse 1
रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी मूरतिमंत तपस्या जैसी
Verse 2
बोले मुनि सुनु सैलकुमारी करहु कवन कारन तपु भारी
Verse 3
केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू हम सन सत्य मरमु किन कहहू
Verse 4
कहत बचत मनु अति सकुचाई हँसिहहु सुनि हमारि जड़ताई
Verse 5
मनु हठ परा न सुनइ सिखावा चहत बारि पर भीति उठावा
Verse 6
नारद कहा सत्य सोइ जाना बिनु पंखन्ह हम चहहिं उड़ाना
Verse 7
देखहु मुनि अबिबेकु हमारा चाहिअ सदा सिवहि भरतारा
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