Book 1 • Chapter 92
Section 92
10 verses
Verse 1
सिवहि संभु गन करहिं सिंगारा जटा मुकुट अहि मौरु सँवारा
Verse 2
कुंडल कंकन पहिरे ब्याला तन बिभूति पट केहरि छाला
Verse 3
ससि ललाट सुंदर सिर गंगा नयन तीनि उपबीत भुजंगा
Verse 4
गरल कंठ उर नर सिर माला असिव बेष सिवधाम कृपाला
Verse 5
कर त्रिसूल अरु डमरु बिराजा चले बसहँ चढ़ि बाजहिं बाजा
Verse 6
देखि सिवहि सुरत्रिय मुसुकाहीं बर लायक दुलहिनि जग नाहीं
Verse 7
बिष्नु बिरंचि आदि सुरब्राता चढ़ि चढ़ि बाहन चले बराता
Verse 8
सुर समाज सब भाँति अनूपा नहिं बरात दूलह अनुरूपा
Verse 9
बिष्नु कहा अस बिहसि तब बोलि सकल दिसिराज
Verse 10
बिलग बिलग होइ चलहु सब निज निज सहित समाज
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