Book 4 • Chapter 22
Section 22
10 verses
Verse 1
बानर कटक उमा में देखा सो मूरुख जो करन चह लेखा
Verse 2
आइ राम पद नावहिं माथा निरखि बदनु सब होहिं सनाथा
Verse 3
अस कपि एक न सेना माहीं राम कुसल जेहि पूछी नाहीं
Verse 4
यह कछु नहिं प्रभु कइ अधिकाई बिस्वरूप ब्यापक रघुराई
Verse 5
ठाढ़े जहँ तहँ आयसु पाई कह सुग्रीव सबहि समुझाई
Verse 6
राम काजु अरु मोर निहोरा बानर जूथ जाहु चहुँ ओरा
Verse 7
जनकसुता कहुँ खोजहु जाई मास दिवस महँ आएहु भाई
Verse 8
अवधि मेटि जो बिनु सुधि पाएँ आवइ बनिहि सो मोहि मराएँ
Verse 9
बचन सुनत सब बानर जहँ तहँ चले तुरंत
Verse 10
तब सुग्रीवँ बोलाए अंगद नल हनुमंत
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