Book 4 • Chapter 23
Section 23
15 verses
Verse 1
सुनहु नील अंगद हनुमाना जामवंत मतिधीर सुजाना
Verse 2
सकल सुभट मिलि दच्छिन जाहू सीता सुधि पूँछेउ सब काहू
Verse 3
मन क्रम बचन सो जतन बिचारेहु रामचंद्र कर काजु सँवारेहु
Verse 4
भानु पीठि सेइअ उर आगी स्वामिहि सर्ब भाव छल त्यागी
Verse 5
तजि माया सेइअ परलोका मिटहिं सकल भव संभव सोका
Verse 6
देह धरे कर यह फलु भाई भजिअ राम सब काम बिहाई
Verse 7
सोइ गुनग्य सोई बड़भागी जो रघुबीर चरन अनुरागी
Verse 8
आयसु मागि चरन सिरु नाई चले हरषि सुमिरत रघुराई
Verse 9
पाछें पवन तनय सिरु नावा जानि काज प्रभु निकट बोलावा
Verse 10
परसा सीस सरोरुह पानी करमुद्रिका दीन्हि जन जानी
Verse 11
बहु प्रकार सीतहि समुझाएहु कहि बल बिरह बेगि तुम्ह आएहु
Verse 12
हनुमत जन्म सुफल करि माना चलेउ हृदयँ धरि कृपानिधाना
Verse 13
जद्यपि प्रभु जानत सब बाता राजनीति राखत सुरत्राता
Verse 14
चले सकल बन खोजत सरिता सर गिरि खोह
Verse 15
राम काज लयलीन मन बिसरा तन कर छोह
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