Book 6 • Chapter 103
Section 103
11 verses
Verse 1
सायक एक नाभि सर सोषा अपर लगे भुज सिर करि रोषा
Verse 2
लै सिर बाहु चले नाराचा सिर भुज हीन रुंड महि नाचा
Verse 3
धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा तब सर हति प्रभु कृत दुइ खंडा
Verse 4
गर्जेउ मरत घोर रव भारी कहाँ रामु रन हतौं पचारी
Verse 5
डोली भूमि गिरत दसकंधर छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर
Verse 6
धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई चापि भालु मर्कट समुदाई
Verse 7
मंदोदरि आगें भुज सीसा धरि सर चले जहाँ जगदीसा
Verse 8
प्रबिसे सब निषंग महु जाई देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई
Verse 9
तासु तेज समान प्रभु आनन हरषे देखि संभु चतुरानन
Verse 10
जय जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा
Verse 11
बरषहि सुमन देव मुनि बृंदा जय कृपाल जय जयति मुकुंदा
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