Book 6 • Chapter 117
Section 117
8 verses
Verse 1
सुनत बिभीषन बचन राम के हरषि गहे पद कृपाधाम के
Verse 2
बानर भालु सकल हरषाने गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने
Verse 3
बहुरि बिभीषन भवन सिधायो मनि गन बसन बिमान भरायो
Verse 4
लै पुष्पक प्रभु आगें राखा हँसि करि कृपासिंधु तब भाषा
Verse 5
चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन गगन जाइ बरषहु पट भूषन
Verse 6
नभ पर जाइ बिभीषन तबही बरषि दिए मनि अंबर सबही
Verse 7
जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं
Verse 8
हँसे रामु श्री अनुज समेता परम कौतुकी कृपा निकेता
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