Book 6 • Chapter 21
Section 21
12 verses
Verse 1
रे कपिपोत बोलु संभारी मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी
Verse 2
कहु निज नाम जनक कर भाई केहि नातें मानिऐ मिताई
Verse 3
अंगद नाम बालि कर बेटा तासों कबहुँ भई ही भेटा
Verse 4
अंगद बचन सुनत सकुचाना रहा बालि बानर मैं जाना
Verse 5
अंगद तहीं बालि कर बालक उपजेहु बंस अनल कुल घालक
Verse 6
गर्भ न गयहु ब्यर्थ तुम्ह जायहु निज मुख तापस दूत कहायहु
Verse 7
अब कहु कुसल बालि कहँ अहई बिहँसि बचन तब अंगद कहई
Verse 8
दिन दस गएँ बालि पहिं जाई बूझेहु कुसल सखा उर लाई
Verse 9
राम बिरोध कुसल जसि होई सो सब तोहि सुनाइहि सोई
Verse 10
सुनु सठ भेद होइ मन ताकें श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें
Verse 11
हम कुल घालक सत्य तुम्ह कुल पालक दससीस
Verse 12
अंधउ बधिर न अस कहहिं नयन कान तव बीस 21
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