Book 6 • Chapter 3
Section 3
11 verses
Verse 1
जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं
Verse 2
जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि
Verse 3
होइ अकाम जो छल तजि सेइहि भगति मोरि तेहि संकर देइहि
Verse 4
मम कृत सेतु जो दरसनु करिही सो बिनु श्रम भवसागर तरिही
Verse 5
राम बचन सब के जिय भाए मुनिबर निज निज आश्रम आए
Verse 6
गिरिजा रघुपति कै यह रीती संतत करहिं प्रनत पर प्रीती
Verse 7
बाँधा सेतु नील नल नागर राम कृपाँ जसु भयउ उजागर
Verse 8
बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई भए उपल बोहित सम तेई
Verse 9
महिमा यह न जलधि कइ बरनी पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी
Verse 10
श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान
Verse 11
ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन
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