Book 6 • Chapter 35
Section 35
17 verses
Verse 1
कपि बल देखि सकल हियँ हारे उठा आपु कपि कें परचारे
Verse 2
गहत चरन कह बालिकुमारा मम पद गहें न तोर उबारा
Verse 3
गहसि न राम चरन सठ जाई सुनत फिरा मन अति सकुचाई
Verse 4
भयउ तेजहत श्री सब गई मध्य दिवस जिमि ससि सोहई
Verse 5
सिंघासन बैठेउ सिर नाई मानहुँ संपति सकल गँवाई
Verse 6
जगदातमा प्रानपति रामा तासु बिमुख किमि लह बिश्रामा
Verse 7
उमा राम की भृकुटि बिलासा होइ बिस्व पुनि पावइ नासा
Verse 8
तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई तासु दूत पन कहु किमि टरई
Verse 9
पुनि कपि कही नीति बिधि नाना मान न ताहि कालु निअराना
Verse 10
रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो यह कहि चल्यो बालि नृप जायो
Verse 11
हतौं न खेत खेलाइ खेलाई तोहि अबहिं का करौं बड़ाई
Verse 12
प्रथमहिं तासु तनय कपि मारा सो सुनि रावन भयउ दुखारा
Verse 13
जातुधान अंगद पन देखी भय ब्याकुल सब भए बिसेषी
Verse 14
रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज
Verse 15
पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज 35(क)
Verse 16
साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ
Verse 17
मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ (ख)
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