Book 6 • Chapter 46
Section 46
13 verses
Verse 1
प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए देखि सुभट रघुपति मन भाए
Verse 2
राम कृपा करि जुगल निहारे भए बिगतश्रम परम सुखारे
Verse 3
गए जानि अंगद हनुमाना फिरे भालु मर्कट भट नाना
Verse 4
जातुधान प्रदोष बल पाई धाए करि दससीस दोहाई
Verse 5
निसिचर अनी देखि कपि फिरे जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे
Verse 6
द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी लरत सुभट नहिं मानहिं हारी
Verse 7
महाबीर निसिचर सब कारे नाना बरन बलीमुख भारे
Verse 8
सबल जुगल दल समबल जोधा कौतुक करत लरत करि क्रोधा
Verse 9
प्राबिट सरद पयोद घनेरे लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे
Verse 10
अनिप अकंपन अरु अतिकाया बिचलत सेन कीन्हि इन्ह माया
Verse 11
भयउ निमिष महँ अति अँधियारा बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा
Verse 12
देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार
Verse 13
एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार
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