Book 6 • Chapter 47
Section 47
10 verses
Verse 1
सकल मरमु रघुनायक जाना लिए बोलि अंगद हनुमाना
Verse 2
समाचार सब कहि समुझाए सुनत कोपि कपिकुंजर धाए
Verse 3
पुनि कृपाल हँसि चाप चढ़ावा पावक सायक सपदि चलावा
Verse 4
भयउ प्रकास कतहुँ तम नाहीं ग्यान उदयँ जिमि संसय जाहीं
Verse 5
भालु बलीमुख पाइ प्रकासा धाए हरष बिगत श्रम त्रासा
Verse 6
हनूमान अंगद रन गाजे हाँक सुनत रजनीचर भाजे
Verse 7
भागत पट पटकहिं धरि धरनी करहिं भालु कपि अद्भुत करनी
Verse 8
गहि पद डारहिं सागर माहीं मकर उरग झष धरि धरि खाहीं
Verse 9
कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ
Verse 10
गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ
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