Book 6 • Chapter 48
Section 48
12 verses
Verse 1
निसा जानि कपि चारिउ अनी आए जहाँ कोसला धनी
Verse 2
राम कृपा करि चितवा सबही भए बिगतश्रम बानर तबही
Verse 3
उहाँ दसानन सचिव हँकारे सब सन कहेसि सुभट जे मारे
Verse 4
आधा कटकु कपिन्ह संघारा कहहु बेगि का करिअ बिचारा
Verse 5
माल्यवंत अति जरठ निसाचर रावन मातु पिता मंत्री बर
Verse 6
बोला बचन नीति अति पावन सुनहु तात कछु मोर सिखावन
Verse 7
जब ते तुम्ह सीता हरि आनी असगुन होहिं न जाहिं बखानी
Verse 8
बेद पुरान जासु जसु गायो राम बिमुख काहुँ न सुख पायो
Verse 9
हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान
Verse 10
जेहि मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान 48(क)
Verse 11
कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध
Verse 12
सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध 48(ख)
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