Book 6 • Chapter 49
Section 49
10 verses
Verse 1
परिहरि बयरु देहु बैदेही भजहु कृपानिधि परम सनेही
Verse 2
ताके बचन बान सम लागे करिआ मुह करि जाहि अभागे
Verse 3
बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही अब जनि नयन देखावसि मोही
Verse 4
तेहि अपने मन अस अनुमाना बध्यो चहत एहि कृपानिधाना
Verse 5
सो उठि गयउ कहत दुर्बादा तब सकोप बोलेउ घननादा
Verse 6
कौतुक प्रात देखिअहु मोरा करिहउँ बहुत कहौं का थोरा
Verse 7
सुनि सुत बचन भरोसा आवा प्रीति समेत अंक बैठावा
Verse 8
करत बिचार भयउ भिनुसारा लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा
Verse 9
कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा नगर कोलाहलु भयउ घनेरा
Verse 10
बिबिधायुध धर निसिचर धाए गढ़ ते पर्बत सिखर ढहाए
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