Book 6 • Chapter 50
Section 50
10 verses
Verse 1
कहँ कोसलाधीस द्वौ भ्राता धन्वी सकल लोक बिख्याता
Verse 2
कहँ नल नील दुबिद सुग्रीवा अंगद हनूमंत बल सींवा
Verse 3
कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही आजु सबहि हठि मारउँ ओही
Verse 4
अस कहि कठिन बान संधाने अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने
Verse 5
सर समुह सो छाड़ै लागा जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा
Verse 6
जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर
Verse 7
जहँ तहँ भागि चले कपि रीछा बिसरी सबहि जुद्ध कै ईछा
Verse 8
सो कपि भालु न रन महँ देखा कीन्हेसि जेहि न प्रान अवसेषा
Verse 9
दस दस सर सब मारेसि परे भूमि कपि बीर
Verse 10
सिंहनाद करि गर्जा मेघनाद बल धीर
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