Book 6 • Chapter 5
Section 5
12 verses
Verse 1
अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई बिहँसि चले कृपाल रघुराई
Verse 2
सेन सहित उतरे रघुबीरा कहि न जाइ कपि जूथप भीरा
Verse 3
सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा
Verse 4
खाहु जाइ फल मूल सुहाए सुनत भालु कपि जहँ तहँ धाए
Verse 5
सब तरु फरे राम हित लागी रितु अरु कुरितु काल गति त्यागी
Verse 6
खाहिं मधुर फल बटप हलावहिं लंका सन्मुख सिखर चलावहिं
Verse 7
जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं घेरि सकल बहु नाच नचावहिं
Verse 8
दसनन्हि काटि नासिका काना कहि प्रभु सुजसु देहिं तब जाना
Verse 9
जिन्ह कर नासा कान निपाता तिन्ह रावनहि कही सब बाता
Verse 10
सुनत श्रवन बारिधि बंधाना दस मुख बोलि उठा अकुलाना
Verse 11
बांध्यो बननिधि नीरनिधि जलधि सिंधु बारीस
Verse 12
सत्य तोयनिधि कंपति उदधि पयोधि नदीस
0:000:00
Speed: