Book 6 • Chapter 60
Section 60
12 verses
Verse 1
तात कुसल कहु सुखनिधान की सहित अनुज अरु मातु जानकी
Verse 2
कपि सब चरित समास बखाने भए दुखी मन महुँ पछिताने
Verse 3
अहह दैव मैं कत जग जायउँ प्रभु के एकहु काज न आयउँ
Verse 4
जानि कुअवसरु मन धरि धीरा पुनि कपि सन बोले बलबीरा
Verse 5
तात गहरु होइहि तोहि जाता काजु नसाइहि होत प्रभाता
Verse 6
चढ़ु मम सायक सैल समेता पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता
Verse 7
सुनि कपि मन उपजा अभिमाना मोरें भार चलिहि किमि बाना
Verse 8
राम प्रभाव बिचारि बहोरी बंदि चरन कह कपि कर जोरी
Verse 9
तव प्रताप उर राखि प्रभु जेहउँ नाथ तुरंत
Verse 10
अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत 60(क)
Verse 11
भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार
Verse 12
मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार 60(ख)
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