Book 6 • Chapter 65
Section 65
12 verses
Verse 1
बंधु बचन सुनि चला बिभीषन आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन
Verse 2
नाथ भूधराकार सरीरा कुंभकरन आवत रनधीरा
Verse 3
एतना कपिन्ह सुना जब काना किलकिलाइ धाए बलवाना
Verse 4
लिए उठाइ बिटप अरु भूधर कटकटाइ डारहिं ता ऊपर
Verse 5
कोटि कोटि गिरि सिखर प्रहारा करहिं भालु कपि एक एक बारा
Verse 6
मुर् यो न मन तनु टर् यो न टार् यो जिमि गज अर्क फलनि को मार्यो
Verse 7
तब मारुतसुत मुठिका हन्यो पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो
Verse 8
पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता घुर्मित भूतल परेउ तुरंता
Verse 9
पुनि नल नीलहि अवनि पछारेसि जहँ तहँ पटकि पटकि भट डारेसि
Verse 10
चली बलीमुख सेन पराई अति भय त्रसित न कोउ समुहाई
Verse 11
अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव
Verse 12
काँख दाबि कपिराज कहुँ चला अमित बल सींव
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