Book 6 • Chapter 7
Section 7
10 verses
Verse 1
नाथ दीनदयाल रघुराई बाघउ सनमुख गएँ न खाई
Verse 2
चाहिअ करन सो सब करि बीते तुम्ह सुर असुर चराचर जीते
Verse 3
संत कहहिं असि नीति दसानन चौथेंपन जाइहि नृप कानन
Verse 4
तासु भजन कीजिअ तहँ भर्ता जो कर्ता पालक संहर्ता
Verse 5
सोइ रघुवीर प्रनत अनुरागी भजहु नाथ ममता सब त्यागी
Verse 6
मुनिबर जतनु करहिं जेहि लागी भूप राजु तजि होहिं बिरागी
Verse 7
सोइ कोसलधीस रघुराया आयउ करन तोहि पर दाया
Verse 8
जौं पिय मानहु मोर सिखावन सुजसु होइ तिहुँ पुर अति पावन
Verse 9
अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात
Verse 10
नाथ भजहु रघुनाथहि अचल होइ अहिवात
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