Book 6 • Chapter 8
Section 8
11 verses
Verse 1
तब रावन मयसुता उठाई कहै लाग खल निज प्रभुताई
Verse 2
सुनु तै प्रिया बृथा भय माना जग जोधा को मोहि समाना
Verse 3
बरुन कुबेर पवन जम काला भुज बल जितेउँ सकल दिगपाला
Verse 4
देव दनुज नर सब बस मोरें कवन हेतु उपजा भय तोरें
Verse 5
नाना बिधि तेहि कहेसि बुझाई सभाँ बहोरि बैठ सो जाई
Verse 6
मंदोदरीं हदयँ अस जाना काल बस्य उपजा अभिमाना
Verse 7
सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा
Verse 8
कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा बार बार प्रभु पूछहु काहा
Verse 9
कहहु कवन भय करिअ बिचारा नर कपि भालु अहार हमारा
Verse 10
सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि
Verse 11
निति बिरोध न करिअ प्रभु मत्रिंन्ह मति अति थोरि
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