Book 6 • Chapter 89
Section 89
8 verses
Verse 1
देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा उपजा उर अति छोभ बिसेषा
Verse 2
सुरपति निज रथ तुरत पठावा हरष सहित मातलि लै आवा
Verse 3
तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा
Verse 4
चंचल तुरग मनोहर चारी अजर अमर मन सम गतिकारी
Verse 5
रथारूढ़ रघुनाथहि देखी धाए कपि बलु पाइ बिसेषी
Verse 6
सही न जाइ कपिन्ह कै मारी तब रावन माया बिस्तारी
Verse 7
सो माया रघुबीरहि बाँची लछिमन कपिन्ह सो मानी साँची
Verse 8
देखी कपिन्ह निसाचर अनी अनुज सहित बहु कोसलधनी
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